हाईकोर्ट ने दिए नया बिजली कनेक्शन देने के आदेश
जबलपुर। 35 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल को लेकर चल रहे हाई-प्रोफाइल मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अल्ट्राटेक सीमेंट को आंशिक राहत दी है। सोमवार को पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदम्बरम ने मुख्यपीठ के समक्ष कंपनी का पक्ष रखा। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद अल्ट्राटेक के नाम पर नया बिजली कनेक्शन जारी करने के निर्देश दिए। बेंच ने यह भी साफ किया कि यह आदेश अंतरिम है और इसके आधार पर कंपनी आगे कोई दावा नहीं कर सकेगी। डिवीजन बेंच ने नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को तय की है।
क्यों बना 35 करोड़ का विवाद?
यह मामला मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की उस रिकवरी से जुड़ा है, जो पहले जेपी सीमेंट रीवा बेला पर दर्शाई गई थी। बाद में इस यूनिट का टेकओवर अल्ट्राटेक सीमेंट ने किया। अल्ट्राटेक का तर्क रहा कि देनदारी जेपी सीमेंट की है, इसलिए उससे वसूली नहीं की जा सकती।
सिंगल बेंच से मिली थी पहले राहत
26 मई 2025 को सिंगल बेंच ने आदेश दिया था कि बकाया राशि की वसूली अल्ट्राटेक के बजाय जेपी सीमेंट से की जाए। इसके बावजूद वसूली कार्रवाई जारी रहने पर विद्युत वितरण कंपनी के चीफ जनरल मैनेजर को तलब किया गया, जिसके बाद बिजली कंपनी ने 13 जनवरी को डिवीजन बेंच में अपील दायर की।
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